मूड क्यों खराब है?
खुशियाँ आसपास होते हुए भी क्यों उदासी छाई रहती है? कई बार तो ऐसा होता है कि जब सब खुश होते हैं, त्योहार मना रहे होते हैं, तब हम अपने आप में खो जाते हैं। चहकने के बजाय चुपचाप अकेले बैठ जाना पसंद करते हैं। यही अकेलापन धीरे-धीरे मूड खराब कर देता है।
हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि भावनाएं संचार करती हैं। जब हम दूसरों से जुड़ते हैं, हंसते हैं, बातें करते हैं, तो मन हल्का हो जाता है। लेकिन जब खुशी के मौकों पर भी हम दूर खड़े रहते हैं, तो दिल बूझ जाता है।
त्योहारों के दौरान भी यही होता है। घर-घर में उमंग होती है, लेकिन किसी के दिल में सन्नाटा। कई बार मौसम भी मूड बिगाड़ देता है। सर्दियों में धूप की कमी, बरसात में घिरावट, सब कुछ दिमाग पर असर डालता है।
अगर आप भी महसूस करते हैं कि खुश होने के बावजूद मन नहीं लग रहा, तो यह सिर्फ मौसम या त्योहार नहीं, बल्कि आपके अंदर की अनसुनी भावनाओं की चिंगारी हो सकती है। कभी
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।