जब लड़का बड़ा हुआ, तो दुखी क्यों हुआ?
एक छोटे से गाँव में एक लड़का था जो बचपन से ही एक पेड़ के साथ खेलता रहा। वह पेड़ सिर्फ लकड़ी और पत्तियों का नहीं, बल्कि उसकी खुशियों का साथी था। बचपन में जब भी उसे ज़रूरत होती, चाहे खेलने की, छाया में बैठने की या फल खाने की, पेड़ हमेशा वहीं खड़ा रहता।
लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ, उसकी दुनिया बदल गई। उसने पढ़ाई-लिखाई की, नौकरी ढूंढी, परिवार बसाया। उसकी ज़रूरतें बढ़ गईं — घर, पैसा, सुविधाएँ। वह बार-बार पेड़ के पास आता, उससे लकड़ी माँगता, छाया चाहता, फल तोड़ता। पेड़ हर बार खुशी से देता रहा।
लेकिन एक दिन, लड़का बूढ़ा हो गया। ताकत कम हो गई, सेहत खराब हो गई। अब वह न खेल सकता, न ऊँचाई पर चढ़ सकता। उसके पास जाने की हिम्मत नहीं थी, लेकिन दिल में एक उदासी थी।
दुख इसलिए भी था क्योंकि अब वह पेड़ भी सूख रहा था। जो एक बार हरा-भरा और जीवंत था, अब उसकी डालियाँ
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।