मनुष्य की सबसे बड़ी भूल क्या है?
आज के समय में हर कोई किसी न किसी पर निर्भर रहने की उम्मीद करता है—माता-पिता पर, दोस्तों पर, प्रेमी या प्रेमिका पर, या फिर भगवान पर। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मनुष्य की सबसे बड़ी भूल क्या हो सकती है? कई दार्शनिकों और आत्म-ज्ञानी लोगों का मानना है कि यह भूल है—किसी दूसरे के सहारे जीना।
आसरा और आशा का भारमनुष्य प्रकृति से ही सामाजिक है, लेकिन यहाँ भूल तब होती है जब वह खुद को भूल जाता है। लोग प्यार में, दोस्ती में, काम में—हर जगह किसी और के ऊपर आशा और उम्मीद लगा देते हैं। जब वे आशा पूरी नहीं होती, तो दर्द, निराशा और टूटन होती है।
सच तो यह है कि कोई भी इंसान किसी दूसरे के लिए पूरी दुनिया नहीं बन सकता। हर कोई अपने सपनों, जिम्मेदारियों और सीमाओं के साथ जी रहा है। इसलिए किसी दूसरे पर आसरा करना, चाहे वह कितना भी करीब हो, आंतरिक शक्ति को कमजोर करता है।
सच्चा समाधान? खुद पर भरोसा। जब आप खुद को जीवन का कें
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