बदलू और लाख की रंग-बिरंगी गोलियाँ
लेखक के मामा के गाँव में एक कारीगर रहता था, जिसका नाम था बदलू। वह लाख से चूड़ियाँ बनाता था – ऐसी नाजुक और मनमोहक चूड़ियाँ कि देखने वाला मुग्ध रह जाए। लेकिन बदलू सिर्फ चूड़ियाँ ही नहीं बनाता था। लेखक के लिए वह कुछ खास भी बनाया करता था।
लाख की रंग-बिरंगी सुंदर गोलियाँ – जिन्हें बदलू छोटे बच्चे के मन को भाने के लिए बनाता। वे गोलियाँ सिर्फ खिलौना नहीं थीं, बल्कि लेखक के बचपन की यादों का हिस्सा बन गईं। हर बार जब लेखक गाँव जाता, तो बदलू के पास जाना उसकी पहली प्राथमिकता होती। उसकी मासूम मुस्कान और वे चमकदार गोलियाँ – दोनों मिलकर एक अनोखा जादू पैदा कर देते थे।बदलू के हाथों ने सिर्फ लाख को नहीं, बल्कि लेखक के बचपन को भी आकार दिय । उसकी कला ने सिर्फ चूड़ियाँ नहीं बनाईं, बल्कि एक बच्चे के दिल में घर भी बना लिया। शायद इसीलिए लेखक को उस गाँव से इतना लगाव था – क्योंकि वहाँ था बस एक कारीग
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