करो या मारो: एक ऐतिहासिक नारा
महात्मा गांधी ने 8 अगस्त, 1942 की पूर्व संध्या में अपने ऐतिहासिक भाषण में पूरे देश को एक मंत्र दिया—"करो या मारो"। यह कोई साधारण नारा नहीं था, बल्कि आजादी की लड़ाई में जान झोंकने की प्रतिज्ञा थी। गांधी जी ने इसे एक "मंत्र" कहा था, जिसे हर भारतीय को अपने दिल पर छाप लेना चाहिए।
यह आह्वान भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत का प्रतीक बना। गांधी जी चाहते थे कि ब्रिटिश शासन तुरंत भारत छोड़ दे, और अगर आजादी के लिए लड़ना पड़े, तो लोग बलिदान देने को तैयार रहें। "करो या मारो" का अर्थ था—हम आजादी पाकर रहेंगे या उसके लिए मर जाएंगे।
इस नारे ने पूरे देश में आग लगा दी। लाखों लोग सड़कों पर उतरे, छात्र, महिलाएं, गांव के किसान—हर कोई एकजुट हो गया। हालांकि ब्रिटिश सरकार ने तुरंत कार्रवाई कर गांधी और अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन आंदोलन नहीं रुका।
आज भी, "करो या मारो" उस समय की अटूट दृढ
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