गांधी जी का अफ्रीका का सफर: एक संयोग की शुरुआत
महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका की यात्रा सिर्फ एक काम के लिए शुरू हुई थी, लेकिन यही यात्रा उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। असल में, दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के व्यापारी दादा अब्दुलाह ने एक वकील की जरूरत महसूस की, जो उनके पारिवारिक कानूनी मामलों में सहायता कर सके। गांधी जी उस समय भारत में कानून की पढ़ाई के बाद वकील के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने की कोशिश में थे, लेकिन अपने देश में काम न मिलने के कारण संघर्ष कर रहे थे।
इसी बीच, वे भारतीय समाज के कुछ परंपराओं और सामाजिक ढांचे से भी थोड़े दूर होना चाहते थे। ऐसे में दादा अब्दुलाह का प्रस्ताव एक सुनहरा अवसर था। इसलिए उन्होंने एक साल के लिए दक्षिण अफ्रीका जाने का फैसला किया। अप्रैल 1893 में गांधी जी डरबन पहुंचे।
लेकिन इस सफर ने उन्हें बदल दिया। अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव का सामना करने के बाद उनके विचारों में गहरा बदलाव आय
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