गांधी ने नमक कानून कैसे तोड़ा?

6 अप्रैल 1930 की सुबह, एक छोटे से समुद्र तट पर, महात्मा गांधी ने धीरे से समुद्र किनारे की रेत से एक मुट्ठी नमक उठाया। यह कोई साधारण काम नहीं था, बल्कि एक बहुत बड़े ऐतिहासिक क्षण की शुरुआत थी। उस वक्त ब्रिटिश सरकार ने नमक बनाने और बेचने पर पूर्ण रूप से अपना नियंत्रण रखा था। आम आदमी के लिए घर पर नमक बनाना भी गैरकानूनी था।

गांधी ने इस अन्याय के खिलाफ अपनी डांडी यात्रा के अंत में, जो लगभग 24 दिन तक चली, नमक कानून को तोड़ने का प्रतीकात्मक कदम उठाया। जब उन्होंने समुद्र तट से नमक उठाया, तो यह कार्रवाई पूरे देश में सविनय अवज्ञा आंदोलन की चिंगारी बन गई।

लाखों लोगों ने उनके इस कदम की प्रेरणा लेकर नमक बनाना शुरू कर दिया। पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया, मगर आंदोलन रुकने के बजाय और तेज होता गया। यह कार्रवाई सिर्फ नमक तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे देश में ब्रिटिश विरोधी आंदोलन को नई ताकत दे दी।

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