बौद्ध धर्म क्या मानता है?
बौद्ध धर्म जीवन के दुखों और उनसे मुक्ति के मार्ग पर केंद्रित है। यह एक ऐसा धर्म है जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता, इसलिए इसे अक्सर नास्तिक धर्म कहा जाता है। बौद्धों का मानना है कि जीवन में आने वाला सुख या दुख किसी दैवीय शक्ति के कारण नहीं, बल्कि व्यक्ति के कर्मों का परिणाम है।
जीवन का चक्र — जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म — कर्मों से बंधा हुआ है। जब तक व्यक्ति अपने कर्मों से बंधा रहता है, तब तक वह दुख से मुक्त नहीं हो सकता। इसीलिए बौद्ध धर्म का मुख्य लक्ष्य है — मोक्ष, यानी कर्मचक्र से निर्मुक्ति।
मोक्ष प्राप्त करने के लिए बुद्ध ने चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग का मार्गदर्शन दिया। चार आर्य सत्य बताते हैं कि दुख है, उसका कारण है, उसका अंत संभव है, और उसके लिए मार्ग भी है। इस मार्ग को ही अष्टांगिक मार्ग कहा जाता है, जिसमें सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक कर्म, सम्यक आजीविका, सम
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