बुद्ध का अंतिम संदेश: मार के सामने अटूट दृढ़ता

भगवान बुद्ध के जीवन के अंतिम दिनों में एक महत्वपूर्ण घटना घटी, जब मार—जो न केवल एक दैत्य या शैतान के रूप में जाना जाता है, बल्कि कामनाओं और मोह का प्रतीक भी है—उनके पास पहुँचा। उसने बुद्ध से विनती की कि वे अब इस जीवन से मुक्ति प्राप्त कर लें, क्योंकि उनका काम पूरा हो चुका था।

मार की विनती सुनकर भगवान बुद्ध ने शांत भाव से उत्तर दिया – “मैं अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर चुका हूँ। तुम चिंता मत करो। मैं आज से तीसरे मास निर्वाण प्राप्त करूँगा।” ये शब्द केवल एक सूचना नहीं थे, बल्कि एक गहरे आत्मविश्वास और पूर्णता के संकेत थे। बुद्ध ने यहाँ यह स्पष्ट कर दिया कि उनका जीवन-लक्ष्य, जो दुख के कारण को जानना और उससे मुक्ति का मार्ग दिखाना था, पूरा हो चुका था।

मार को इस बात की प्रतीक्षा थी कि बुद्ध जीवन के प्रति लगाव छोड़ेंगे और अंतिम शांति को स्वीकार करेंगे। जब उन्होंने बुद्ध के मुख से यह वचन सुना, तो व

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