भगवान शिव की रक्षा कौन कर सकता है?

भगवान शिव को स्वयं संहारक और त्रिलोक के स्वामी कहा जाता है, ऐसे में सवाल उठता है कि उनकी रक्षा कौन कर सकता है? लेकिन दरअसल, शिव की रक्षा का सवाल नहीं, बल्कि उनके स्वरूप की समझ का है। शिव के भिक्षाटन अवतार में हम इसी गहराई को देखते हैं।

भिक्षाटन शिव का एक ऐसा रूप है जहाँ वे एक भटकते तपस्वी के रूप में प्रकट होते हैं—लंबे बाल, त्रिशूल लिए, एक खोपड़ी के कटोरे में भिक्षा माँगते हुए। यह रूप कपाली की भूमिका को दर्शाता है, जो कपालिका संप्रदाय के साधुओं से जुड़ा है। ये साधु शिव की उपासना अत्यंत तांत्रिक और तपस्वी ढंग से करते थे।

खोपड़ी उनके लिए सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और मृत्यु के साथ एकता का प्रतीक थी। वे त्रिशूल और जादुई शक्तियों से स्वयं की रक्षा करते थे। लेकिन यह सब शिव के ही स्वरूप का हिस्सा है—माया का खेल, तप की गहराई, और भक्ति का अनूठा मार्ग।

तो अंततः, शिव की रक्षा करने वाला शि

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