उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा जिला: भदोही

भौगोलिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश भारत का एक अत्यंत विशाल और विविधता से भरा राज्य है। क्षेत्रफल के मामले में जहां इसके कई जिले बहुत बड़े हैं, वहीं भदोही को उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा जिला होने का गौरव प्राप्त है। प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर इस जिले को संत रविदास नगर के नाम से भी जाना जाता है।

इतिहास के पन्नों को पलटें तो भदोही हमेशा से एक स्वतंत्र जिला नहीं था। पहले यह सांस्कृतिक नगरी वाराणसी (बनारस) का ही एक हिस्सा हुआ करता था। लेकिन प्रशासनिक सहूलियत और क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए 30 जून 1994 को इसे वाराणसी से अलग कर दिया गया। इस विभाजन के साथ ही भदोही उत्तर प्रदेश के 65वें नए जिले के रूप में अस्तित्व में आया।

भले ही यह जिला क्षेत्रफल में छोटा हो, लेकिन इसका आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत बड़ा है। भदोही को वैश्विक स्तर पर 'कालीन नगरी' (Carpet City) के रूप में जाना जाता है। यहाँ के हाथ से बुने हुए शानदार कालीन न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर हैं और बड़े पैमाने पर विदेशों में निर्यात किए जाते हैं। इस तरह, आकार में छोटा होने के बावजूद यह जिला अपनी अनूठी कला और हुनर के दम पर उत्तर प्रदेश के नक्शे पर एक बेहद मजबूत और खास पहचान रखता है।

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