आत्मा क्या है? क्या कोई उसे देख सकता है?

आत्मा कोई ऐसी चीज नहीं जिसे आँखों से देखा जा सके, लेकिन इसकी उपस्थिति महसूस की जा सकती है। कई धार्मिक और दार्शनिक परंपराओं में कहा गया है कि आत्मा अविनाशी है। वह न तो जन्मती है, न मरती है। वह हर प्राकृतिक परिवर्तन से परे है।

शरीर बदलता रहता है, समय के साथ पुराना हो जाता है, लेकिन आत्मा वही रहती है। यह वैसे ही है जैसे कोई व्यक्ति पुराने कपड़े उतारकर नए पहन लेता है—आत्मा भी एक शरीर छोड़कर दूसरे में प्रवेश कर लेती है। इसका एकमात्र स्वाभाविक गुण है—प्रसार होना और अंततः ईश्वर में विलीन हो जाना।

जब तक आत्मा अपने मूल स्रोत, ईश्वर तक नहीं पहुँचती, तब तक वह जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसी रहती है। यह नहीं कि आत्मा कोई तस्वीर या आकृति हो, बल्कि वह एक चेतना है—एक ऐसी ज्योति जो शरीर के भीतर रहकर जीवन को सार्थक बनाती है।

इसलिए, आत्मा देखी नहीं जा सकती, लेकिन उसकी उपस्थिति उन पलों में मह

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