कृष्ण और दूध का लालच

बाल गोपाल श्रीकृष्ण की लीलाएँ सदियों से भक्तों के हृदय में बसी हुई हैं। उनकी मासूमियत, शरारतें और माता यशोदा की ममता का हर पल एक अलग ही मिठास बिखेरता है। ऐसा ही एक प्रसंग है, जब बालकृष्ण दूध पीने के लिए तैयार हुए — लेकिन किसी आज्ञा या जबरदस्ती के कारण नहीं, बल्कि एक छोटे से लालच के कारण।

चोटी लंबी होगी, इस लोभ में दूध पिया

माता यशोदा को पता था कि छोटे कान्हा को मनाने के लिए कुछ खास करना पड़ेगा। इसलिए वे उनसे कहतीं — “जितना दूध पियोगे, उतनी तुम्हारी चोटी लंबी होगी!” यह सुनकर कृष्ण की आँखों में चमक आ जाती। वे सोचते होंगे कि लंबी चोटी तो बहुत सुंदर लगेगी, शायद सखियाँ भी तारीफ करेंगी। इसी उम्मीद में वे दूध के लिए तैयार हो जाते।

यह प्रसंग सिर्फ एक मासूम बच्चे की लीला नहीं, बल्कि मातृ-प्रेम की गहराई भी दिखाता है। यशोदा मैया ने बिना डाँटे, बिना जबरदस्ती किए, प्यार की एक सरल बात से बच्चे को स्वस्थ आदतों की ओर ले आया।

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