कर्ण का सारथी कौन था?

महाभारत के महान युद्ध के दौरान, कर्ण जैसे महारथी के सारथी का रूप धारण करने वाले थे शल्य। वे मद्र देश के राजा थे और पांडवों की माँ माद्री के भाई, यानी रिश्ते में पांडवों के मामा थे। यहीं रोचक बात यह है कि जिन पांडवों के सगे मामा थे, वे अंत में कौरव पक्ष में जाकर कर्ण के सारथि बने।

युद्ध से पहले, दुर्योधन ने चालाकी से शल्य को अपने पक्ष में ले लिया। उनकी सेना में शामिल होने के बाद उन्हें ऊँचा सम्मान दिया गया। कर्ण के सारथी के रूप में शल्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी, क्योंकि सारथी सिर्फ रथ चलाने वाला नहीं होता, बल्कि वह योद्धा का मार्गदर्शक, सलाहकार और कभी-कभी आलोचक भी होता है।

शल्य ने कर्ण के साथ रथ पर बैठकर अनेक युद्ध दृश्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, हालाँकि कहा जाता है कि वे कर्ण के प्रति कभी-कभी तीखी टिप्पणियाँ भी करते थे। फिर भी, उनका रथ पर साथ देना कर्ण के लिए एक महत्वपूर्ण सहायता थी।

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