गांधीजी के मूल सिद्धांत: सत्य और अहिंसा की शक्ति

महात्मा गांधी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने पूरे जीवन ईश्वर और मानवता में विश्वास रखा। उन्होंने कभी भी सत्ता पाने या अपना वर्चस्व कायम करने की चाहत में कदम नहीं रखा। वे सच्चे अर्थों में जनता के नेता थे — वहीं खड़े होते जहां गरीब, दलित और उपेक्षित लोग थे।

उनके लिए निचले तबके के लोगों के साथ हो रहे अन्याय को देखना बर्दाश्त से बाहर था। इसी तकलीफ ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। लेकिन उन्होंने लड़ाई किसी तलवार या गोलियों से नहीं, बल्कि सत्य और अहिंसा के हथियार से लड़ी। ये दोनों उनके जीवन के मूल सिद्धांत थे।

गांधीजी मानते थे कि सच्चाई तक पहुंचने के लिए हिंसा नहीं, बल्कि प्रेम और धैर्य की जरूरत होती है। उन्होंने दिखाया कि एक साधारण आदमी भी अगर सच्चाई पर डटा रहे, तो वह साम्राज्य को झुका सकता है।

आज भी जब कहीं अन्याय ह

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