महात्मा गांधी और चौथा बंदर: स्वच्छता का संदेश
महात्मा गांधी के नाम से जुड़े तीन बंदर — न देखूं, न बोलूं, न सुनूं — तो हम सबने देखे हैं। ये बंदर नैतिक जीवन का संदेश देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी चौथे बंदर के बारे में सुना है? हालाँकि ऐतिहासिक रूप से गांधीजी से इन बंदरों का सीधा संबंध नहीं है, लेकिन आज इस कल्पना को एक नया मोड़ दिया गया है।
2016 में, एक टी-शर्ट पर गांधीजी के साथ चौथे बंदर की तस्वीर वायरल हुई, जो "खुले में मत हगो" का संदेश दे रहा था। यह चौथा बंदर स्वच्छता की अहमियत को उजागर करता है। यह संदेश स्वच्छ भारत अभियान के जज़्बे से प्रेरित था, जिसका उद्देश्य खुले में शौच की आदत को खत्म करना था।
गांधीजी ने भी स्वच्छता को जीवन का अहम हिस्सा माना था। वे कहते थे, "स्वच्छता स्वराज्य से भी बढ़कर है।" इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए, यह चौथा बंदर मजाकिया अंदाज में गंभीर संदेश देता है — शौचालय का उपयोग करें, स्वच्छ रहें, स्वस्थ रह
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