भारतीय राष्ट्रवाद: ब्रिटिश देन या प्राचीन विरासत?

कई पश्चिमी विद्वान यह मानते हैं कि भारत में राष्ट्रवाद की भावना ब्रिटिश शासन के कारण ही जागी। उनका कहना है कि इससे पहले भारतीय लोग राष्ट्रीयता की चेतना से अनजान थे। लेकिन यह धारणा गहराई से जांच करने पर गलत साबित होती है।

भारतीय राष्ट्रवाद की जड़ें प्राचीन हैं। हमारे धार्मिक ग्रंथ, इतिहास और साहित्य से ज्ञात होता है कि 'भारत' के प्रति अटूट प्रेम और एकता की भावना हजारों सालों से मौजूद रही है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में 'भारत भूमि' की पवित्रता और उसकी रक्षा का बार-बार उल्लेख मिलता है।

महर्षि वेदव्यास ने 'भारतवर्ष' को धर्म और संस्कृति की धरती के रूप में परिभाषित किया था। चाणक्य जैसे नेताओं ने राष्ट्र की एकता और सुरक्षा पर जोर दिया। अकबर और शिवाजी जैसे शासकों ने भी 'भारत' के विचार को महत्व दिया।

ब्रिटिश ने राष्ट्रवाद को नहीं, बल्कि उसे जगाया। उनके शोषण और भेदभाव ने भारतीय

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