बुनियादी शिक्षा: महात्मा गांधी की अमूल्य देन

बुनियादी शिक्षा भारत के महान नेता और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सर्वाधिक महत्वपूर्ण देनों में से एक है। इसे आमतौर पर नयी तालीम, वर्धा योजना, बुनियादी तालीम या बेसिक शिक्षा के नाम से भी जाना जाता है। गांधीजी का मानना था कि शिक्षा सिर्फ पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह जीवन के साथ जुड़ी होनी चाहिए।

२३ अक्टूबर, १९३७ को गांधीजी ने नयी तालीम की योजना प्रस्तुत की, जिसका उद्देश्य देश के हर बच्चे तक शिक्षा की पहुँच बनाना था। इस योजना का मुख्य आधार था – कर्म के माध्यम से शिक्षा। बच्चे न सिर्फ पढ़-लिख सीखेंगे, बल्कि हाथ से काम सीखकर आत्मनिर्भर भी बनेंगे। इसमें कला, श्रम, नैतिकता और देशभक्ति को समान महत्व दिया गया।

गांधीजी चाहते थे कि शिक्षा न केवल बच्चों के दिमाग को बल्कि उनके हाथों और हृदय को भी विकसित करे। उनका यह सपना आज भी प्रासंगिक है,

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय