गांधीजी की शक्ति की उपासना
महात्मा गांधी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने आत्मबल की असली शक्ति में अटूट विश्वास रखा। उन्होंने कभी तलवार नहीं उठाई, न ही किसी को घृणा से देखा। फिर भी, उनकी शक्ति इतनी बड़ी थी कि पूरी ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गई।
उनके जीवनीकार रोम्यां रोलां ने ठीक ही कहा था—वे 'बिना क्रॉस के क्राइस्ट' थे। वे ईसा मसीह की तरह अहिंसा और प्रेम का मार्ग चुनते हुए भी अपने सिद्धांतों के प्रति अडिग रहे। वे 'एक आदमी की सेना' थे—एकाकी, पर अद्वितीय।
गांधीजी ने बलहीन व्यक्ति के लिए कभी आदर्श नहीं बनाया। उपनिषद की उस उक्ति में उनका गहरा विश्वास था—'बलहीन व्यक्ति अपनी आत्मा को प्राप्त नहीं कर सकता'। उनके लिए शक्ति का मतलब ताकत से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और नैतिक बल से था।
वे न तो किसी को मारने के पक्षधर थे, न मार खाने के। उनका मार्ग था—सत्य के माध्यम से शक्ति पाने का। उन
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