सौर मंडल का सबसे दूर का ग्रह: वरुण
सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह वरुण है। चाहे बात सूर्य की हो या पृथ्वी की, हर मापदंड में वरुण ही सबसे अंतिम ग्रह है। यह सौर मंडल का आठवां और सबसे बाहरी ग्रह माना जाता है, खासकर यूरेनस के बाद से जब प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से बाहर कर दिया गया।
वरुण ग्रह न केवल दूर है, बल्कि आकार में भी बहुत बड़ा है। यह सौर मंडल का चौथा सबसे बड़ा ग्रह है और तीसरा सबसे भारी भी। इसका व्यास पृथ्वी से लगभग चार गुना बड़ा है। यह एक बर्फीला दानव (Ice Giant) है, जिसका अधिकांश भाग हाइड्रोजन, हीलियम और मीथेन से बना है, जो इसे नीले रंग का दिखाई देने का कारण बनता है।
वरुण इतना दूर है कि सूर्य का प्रकाश यहाँ पहुँचने में लगभग 4 घंटे लगते हैं। एक वर्ष यहाँ पृथ्वी के 165 वर्ष के बराबर होता है। यह ग्रह इतनी तेजी से घूमता है कि इसका एक दिन महज 16 घंटे का होता है।
इतनी दूरी के कारण वरुण को दूरबीन या विशेष उपकरणों के बिना देख पाना लगभग असंभव है। अब तक केवल एक ही अंतरिक्ष यान, वॉयेजर 2, वरुण के पास से गुजरा है, जिसने 1989 में इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जमा की।
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