स्वराज: एक ऐतिहासिक शब्द की शुरुआत
स्वराज—यह शब्द आज भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस शक्तिशाली शब्द का प्रथम प्रयोग कब और किसने किया? यह पहली बार दादाभाई नौरोजी ने किया था।
वर्ष 1906 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी ने अपने उद्बोधन में 'स्वराज' शब्द का प्रयोग किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को अपने ही हाथों में सत्ता लेने का अधिकार है। उनका यह नारा बाद में महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा आंदोलन का आधार बना।
दादाभाई नौरोजी को 'भारत का ज्वाला मशाल' कहा जाता था। वे न केवल एक राजनेता थे, बल्कि एक विचारक, अर्थशास्त्री और ब्रिटिश संसद के पहले भारतीय सदस्य भी थे। उन्होंने 'भारत का निष्कर्षण' की अवधारणा को भी प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने बताया कि ब्रिटिश शासन भारत के संसाधनों को खींचकर अपने देश में ले जा रहा है।
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