स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है – बाल गंगाधर तिलक का अमर नारा
भारत की आज़ादी की लड़ाई में कई महान स्वतंत्रता सेनानी आगे आए, लेकिन बाल गंगाधर तिलक का नाम उनमें सबसे ऊपर आता है। उन्होंने एक ऐसा नारा दिया जो पूरे देश में गूंज उठा – “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मुझे मिलकर रहना ही होगा”। यह नारा सिर्फ एक वाक्य नहीं था, बल्कि भारतीयों के दिलों में जगने वाली आज़ादी की आग का प्रतीक था।
तिलक ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन-जागरण को अपना मुख्य हथियार बनाया। उन्होंने गणेश चतुर्थी और शिवाजी उत्सव जैसे त्योहारों के माध्यम से लोगों को एकजुट किया और राष्ट्रीय भावनाओं को बल दिया। उनके संपादकीय काम, खासकर अपने अखबार केसरी (मराठी) और मराठा (अंग्रेजी) के जरिए, वे सीधे जनता तक पहुंचते थे और सरकार की नीतियों पर तीखी आलोचना करते थे।
23 जुलाई को उनका जन्मदिन है, जिसे देशभर में उनकी वीरता और समर्पण को याद करके मनाया जाता है। उन्
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