शिव जी के पांच सिर और एक रहस्यमयी कथा

भगवान शिव की अनेक कथाओं में से एक दिलचस्प कहानी उनके पांच सिरों की है। कहा जाता है कि शुरू में शिव जी के पांच सिर थे, जो उनकी पांच आत्माओं या पंच वाकों का प्रतीक माने जाते हैं। हर सिर एक दिशा की ओर था – उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और ऊपर की ओर, जो उनकी सर्वव्यापी उपस्थिति को दर्शाता है।

लेकिन एक दिन, ब्रह्मा ने अपनी महिमा को लेकर अहंकार प्रकट किया। उन्होंने यह दावा किया कि वे सृष्टि के सर्वोच्च देव हैं। इस पर क्रोधित होकर शिव जी ने अपने एक सिर को काट दिया, जो ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट करने का प्रतीक बना। कुछ पौराणिक कथाओं में यह भी कहा गया है कि शिव के एक सिर को काटने के बाद वह सिर ब्रह्मा के हाथ में चिपक गया और उन्हें भटकते रहना पड़ा, जब तक कि उन्होंने अपनी गलती के लिए क्षमा नहीं मांग ली।

इस कथा का संदेश स्पष्ट है – अहंकार का अंत हमेशा विनाश से होता है, और शिव जी का क्रोध भी धर्म की रक्षा के लिए होता है।

आज भी शिवलिंग

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय