माँ काली की सवारी: गर्दभ और उसका अर्थ

माँ काली हिंदू धर्म में शक्ति और परिवर्तन की देवी हैं। उनके भयंकर रूप के बावजूद वह भक्तों के लिए अत्यंत कल्याणकारी हैं। उन्हें अक्सर खुले बालों वाली, नरमुंडों की माला पहने, हाथ में खप्पर और तलवार लिए दर्शाया जाता है। एक विशेष बात यह है कि उनके हाथ में एक कटा हुआ सिर होता है, जिससे रक्त टपकता रहता है—यह अहंकार के विनाश का प्रतीक है।

अब सवाल उठता है—माँ काली की सवारी क्या है? प्राचीन ग्रंथों और चित्रकारी में माँ काली को अक्सर गर्दभ (गधे) पर सवार दिखाया गया है। गधा आमतौर पर एक साधारण और धीमे चलने वाले जानवर के रूप में जाना जाता है, लेकिन यहाँ इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। गर्दभ अहंकार, मूर्खता और आलस्य का प्रतीक माना जाता है। माँ काली का उस पर आरूढ़ होना इस बात का संकेत है कि वह इन नकारात्मक गुणों पर विजय प्राप्त करती हैं।

इस प्रकार, माँ काली का गर्दभ पर सवार होना केवल एक चित्रण नहीं, बल्क

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