पत्नी पति के बाईं ओर क्यों बैठती है?

हिंदू संस्कारों और शास्त्रों में विवाहित जीवन को लेकर कई पवित्र परंपराएँ बताई गई हैं। इनमें से एक है — पत्नी का पति के बाईं ओर बैठना। कई लोगों को यह आदत अजीब लग सकती है, लेकिन इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अर्थ छिपा है।

शास्त्रों के अनुसार, स्त्री पुरुष की वामांगिनी (बाईं ओर की आधी) होती है। इसलिए विवाह के समय दोनों एक साथ खड़े होते हैं तो पत्नी पति के बाईं ओर ही रहती है। यह नियम सिर्फ बैठने तक सीमित नहीं है। सिंदूर भरते समय, द्विरागमन (सत्तूर), भोजन करते वक्त, सोते समय, पूजा-आराधना या ब्राह्मण के पैर धोते समय भी यही व्यवस्था रहती है।

बाईं ओर बैठने का मकसद सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि ऊर्जा के संतुलन और शुभ फल प्राप्ति माना जाता है। पुराणों में ऐसा माना जाता है कि इस व्यवस्था से दंपति के जीवन में समृद्धि, स्थिरता और आशीर्वाद बना रहता है।

समय बदल रहा है, लेकिन कई घरों में आज भी

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