गौतम अडानी का शुरुआती सफर: मुंबई से हीरे के व्यापार तक
आज दुनिया के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शुमार गौतम अडानी की सफलता की कहानी किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। बहुत कम लोग जानते हैं कि अरबों डॉलर का साम्राज्य खड़ा करने वाले अडानी ने अपने करियर की शुरुआत किसी बड़े बिजनेस हाउस से नहीं, बल्कि मुंबई की तंग गलियों में हीरे छांटने के काम से की थी।
साल 1978 में जब अडानी महज एक किशोर थे, वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए अहमदाबाद छोड़कर मुंबई चले आए। आर्थिक रूप से खुद को मजबूत करने के लिए उन्होंने 'महेंद्र ब्रदर्स' में एक डायमंड सॉर्टर (हीरा छांटने वाले) के रूप में काम करना शुरू किया। लगभग दो से तीन वर्षों तक वहां काम करते हुए उन्होंने बिजनेस की बारीकियाँ सीखीं और बाजार के उतार-चढ़ाव को गहराई से समझा।
व्यापार की बुनियादी समझ हासिल करने के बाद, अडानी ने मुंबई के प्रसिद्ध झवेरी बाजार में अपनी खुद की डायमंड ब्रोकरेज फर्म स्थापित की। यही वह कदम था जिसने उनके अंदर के असली उद्यमी को बाहर निकाला। हीरे के व्यापार से मिले इस शुरुआती अनुभव और आत्मविश्वास ने ही आगे चलकर उनके लिए 'अडानी समूह' की नींव रखने का रास्ता साफ किया।
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