अमेरिका और भारत में गरीबी की रेखा: एक बड़ा अंतर
गरीबी को मापने का तरीका हर देश में अलग होता है। जब हम दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका की तुलना भारत से करते हैं, तो गरीबी की परिभाषा में एक जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिलता है।
अमेरिका में आधिकारिक मानकों के अनुसार, जिस परिवार की सालाना आय लगभग 25 लाख रुपये ($30,000 के करीब) से कम होती है, उसे गरीब श्रेणी में गिना जाता है। यह आंकड़ा सुनने में काफी बड़ा लगता है, लेकिन अमेरिका जैसे विकसित देश में रहने का खर्च, किराया, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजमर्रा की ज़रूरतें बहुत महंगी होती हैं। यही कारण है कि वहां इतनी आय वाले परिवारों को भी बुनियादी जीवन स्तर बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ता है।
दूसरी तरफ, भारत जैसे विकासशील देश में गरीबी रेखा का पैमाना बिल्कुल अलग है। भारत के शहरी इलाकों में जिस परिवार या व्यक्ति की सालाना आय लगभग 61,728 रुपये (या लगभग 5,000 रुपये प्रति महीना) से कम है, उसे आधिकारिक तौर पर गरीब माना जाता है।
यह तुलना यह दर्शाती है कि गरीबी केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह किसी देश की क्रय शक्ति (Purchasing Power) और वहां के रहन-सहन के खर्च (Cost of Living) पर निर्भर करती है। अमेरिका में जिसे गरीबी रेखा माना जाता है, वह राशि कई अन्य देशों में एक आरामदायक जीवन जीने के लिए काफी हो सकती है।
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