अल्ट्रासाउंड की सीमाएं: क्या जानना है जरूरी?

चिकित्सा विज्ञान में अल्ट्रासाउंड एक बेहद सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है, जो ध्वनि तरंगों (sound waves) की मदद से शरीर के आंतरिक अंगों की तस्वीरें दिखाती है। गर्भावस्था से लेकर आंतरिक सूजन का पता लगाने तक, यह जांच बहुत मददगार है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अल्ट्रासाउंड की भी अपनी कुछ सीमाएं होती हैं और यह शरीर के हर हिस्से या हर बीमारी को नहीं देख सकता?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अल्ट्रासाउंड कभी भी यह स्पष्ट रूप से नहीं बता सकता कि कोई गांठ या ट्यूमर कैंसर (cancer) है या नहीं। यह केवल ट्यूमर के आकार, बनावट और उसके ठोस या तरल (fluid-filled) होने की जानकारी दे सकता है। कैंसर की सटीक पुष्टि के लिए बायोप्सी या अन्य उन्नत स्कैन की आवश्यकता होती है।

इसके अलावा, अल्ट्रासाउंड की ध्वनि तरंगें हवा और हड्डी के पार नहीं जा सकतीं। यही कारण है कि फेफड़ों (lungs) जैसी जगहों पर, जहाँ हवा भरी होती है, अल्ट्रासाउंड काम नहीं करता। ठीक इसी तरह, सिर की हड्डी (skull) या रीढ़ की हड्डी के भीतर छिपे हिस्सों को देखने में भी ध्वनि तरंगें नाकाम रहती हैं। पेट की जांच के दौरान भी यदि गैस (हवा) अधिक हो, तो तस्वीरें साफ नहीं आतीं। इसलिए, डॉक्टर फेफड़ों या हड्डियों की जांच के लिए अक्सर एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई की सलाह देते हैं।

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