आंखों का रंग नीला क्यों और कैसे होता है?

क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया में कुछ लोगों की आंखें इतनी खूबसूरत नीली क्यों होती हैं? इसका जवाब विज्ञान और हमारे शरीर के भीतर छिपे जेनेटिक्स में छुपा है। आंखों का रंग पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी आंखों के हिस्से यानी परितारिका (Iris) में किस मात्रा में पिगमेंट मौजूद है।

हमारी आंखों का रंग सीधे तौर पर मेलेनिन (Melanin) नाम के वर्णक की मात्रा से जुड़ा होता है। जिन लोगों की आंखें भूरी या गहरी होती हैं, उनकी परितारिका में मेलेनिन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इसके विपरीत, नीली आंखों वाले लोगों की परितारिका में यह पिगमेंट बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। जब रोशनी इस कम मेलेनिन वाली परत से टकराती है, तो प्रकाश के बिखरने के कारण आंखें नीली नजर आती हैं।

यह पूरी प्रक्रिया हमारे माता-पिता से मिलने वाले आनुवंशिक गुणों यानी जेनेटिक्स से तय होती है। हमारे डीएनए में मौजूद गुणसूत्र 15 (Chromosome 15) पर एक खास क्षेत्र होता है, जो आंखों के रंग को तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि बच्चों में आंखों का रंग अक्सर उनके परिवार के जेनेटिक इतिहास से जुड़ा होता है।

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