आजादी से पहले का भारत: एक नजर
आजादी से पहले 20वीं सदी की शुरुआत का दौर भारतीय इतिहास का एक ऐसा अध्याय था, जब देश विदेशी ताकतों की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। सदियों के विदेशी शासन के कारण यहाँ की राजनीतिक बागडोर कभी भारतीयों के हाथों में नहीं रही।
उस दौर में भारत को एक स्वतंत्र और वैध देश के रूप में पहचान नहीं दी जाती थी, बल्कि इसे महज़ एक उपनिवेश माना गया। यहाँ के लोगों का भविष्य और नीतियां विदेशी हुक्मरानों के इशारों पर तय होती थीं, जिससे देश के भीतर गहरा असंतोष सुलग रहा था।
यही वह कठिन समय था जिसने भारतीयों के दिलों में अपनी खुद की सरकार और पहचान बनाने की चिंगारी को भड़काया, जो आगे चलकर एक विशाल स्वतंत्रता आंदोलन के रूप में सामने आया।
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