ईश्वर कहां है?

यह एक ऐसा शाश्वत सवाल है जो सदियों से इंसानी दिमाग में घूम रहा है। अमूमन लोग भगवान को मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों या गुरुद्वारों जैसी धार्मिक जगहों पर ढूंढते हैं। कुछ लोग आसमान की तरफ देखते हैं, तो कुछ पहाड़ों और जंगलों की शांति में उसे तलाशते हैं। लेकिन हमारी प्राचीन परंपराएं और आध्यात्मिक ज्ञान कुछ और ही इशारा करते हैं।

असल में, ईश्वर किसी एक खास जगह या कोने में सीमित नहीं है। वह सृष्टि के कण-कण में मौजूद है। हवा की सरसराहट, बहती नदियां, खिलते हुए फूल और प्रकृति की हर अनूठी रचना में उसकी मौजूदगी का अहसास होता है। वह एक ऐसी परम ऊर्जा है जो पूरी दुनिया को चला रही है।

संतों और विचारकों का मानना है कि ईश्वर को बाहर खोजने से बेहतर है कि हम उसे अपने भीतर तलाशें। जब हम शांत मन से अपने दिल में झांकते हैं, तो हमें उस सर्वोच्च शक्ति का अनुभव होता है। हर इंसान के भीतर मौजूद अच्छाई, दया, प्रेम और करुणा ही ईश्वर का असली रूप हैं। जब आप किसी भूखे को खाना खिलाते हैं या किसी मजबूर की मदद करते हैं, तो आप सीधे ईश्वर के करीब होते हैं।

संक्षेप में कहें तो, ईश्वर को ढूंढने के लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। वह आपके बेहद करीब, आपके अपने भीतर और इस पूरी कायनात में हर पल मौजूद है। बस जरूरत है तो एक सच्चे और साफ दिल से उसे महसूस करने की।

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