यह जानकारी बिल्कुल सही है कि वर्तमान में ईसाई धर्म (Christianity) वैश्विक स्तर पर ग्लोबल साउथ (Global South) यानी मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका (दक्षिण अमेरिका) में सबसे तेजी से बढ़ रहा है।
इस बदलाव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
अफ्रीका (Africa): यह महाद्वीप वर्तमान में ईसाई धर्म के विकास का सबसे बड़ा केंद्र है। 20वीं शताब्दी की शुरुआत में जहां अफ्रीका में ईसाइयों की संख्या बहुत कम थी, वहीं आज यह आंकड़ा सौ करोड़ के करीब (या उससे भी अधिक) पहुँचने की ओर अग्रसर है। विशेष रूप से उप-सहारा अफ्रीका (Sub-Saharan Africa) में जनसंख्या वृद्धि और धार्मिक रूपांतरण दोनों के कारण ईसाई धर्म तेजी से फैल रहा है।
एशिया (Asia): एशिया में, दक्षिण कोरिया, चीन (भूमिगत चर्चों के माध्यम से) और भारत के कुछ हिस्सों में ईसाई आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
लैटिन अमेरिका (Latin America): हालांकि पारंपरिक रूप से यह क्षेत्र कैथोलिक बहुल रहा है, लेकिन यहाँ प्रोटेस्टेंट और पेंटेकोस्टल (Pentecostal) चर्चों का प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
इसके विपरीत, पारंपरिक रूप से ईसाई बहुल माने जाने वाले पश्चिमी देशों (जैसे यूरोप और उत्तरी अमेरिका) में धर्मनिरपेक्षता (Secularism) बढ़ने के कारण चर्च जाने वालों की संख्या में कमी आ रही है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।