ऊपरी हवा कैसे पहचानें?
कई बार हम देखते हैं कि कोई व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के कांपता रहता है, बार-बार ज्वर या मिरगी जैसी समस्याओं से ग्रस्त रहता है। ज्योतिष के अनुसार ऐसी स्थिति में ऊपरी हवा या नजर दोष की आशंका होती है।
राहु, शनि और केतु को ऊपरी हवा के प्रमुख कारक माना जाता है। जब ये ग्रह लग्न (शरीर), गुरु (बुद्धि व ज्ञान), त्रिकोण भाव (धर्म और आध्यात्मिकता) या द्विस्वभाव राशियों—मिथुन, कर्क, धनु और मीन—पर प्रभाव डालते हैं, तो व्यक्ति इस उपद्रव का शिकार हो सकता है।
विशेष रूप से अगर कुंडली में शनि या राहु का प्रभाव लग्न पर हो, या फिर गुरु पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो, तो यह समस्या और भी गहराई ले सकती है। ऐसे व्यक्ति का शरीर अक्सर कंपकंपाता है, मन भ्रमित रहता है और शारीरिक-मानसिक दुर्बलता बढ़ती जाती है।
हालांकि, ज्योतिषीय उपाय जैसे रत्न धारण, हनुमान चालीसा का नियमित पाठ या शनि-राहु के शांति उपाय करने से इसका प्रभाव कम हो सकता है। स
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