ओजोन परत: पृथ्वी की सुरक्षा कवच

ओजोन परत पृथ्वी के ऊपर लगभग 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित होती है और इसकी औसत मोटाई लगभग 3 किलोमीटर होती है। यह परत स्ट्रैटोस्फीयर में मौजूद है और पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बिना सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणें सीधे धरती पर आतीं, जिससे त्वचा कैंसर, आंखों की बीमारियां और पारिस्थितिकी तंत्र में खलल पड़ सकता है।

वायुमंडल में मौजूद कुल ओजोन का 91% से अधिक इसी परत में पाया जाता है। यह आंकड़ा इस बात को रेखांकित करता है कि ओजोन परत कितनी महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह मोटाई स्थिर नहीं होती। मौसम, भूगोल और समय के हिसाब से इसमें बदलाव आते रहते हैं। उदाहरण के लिए, ध्रुवीय क्षेत्रों में विशेष रूप से वसंत ऋतु में ओजोन परत पतली होने की घटना देखी जाती है, जिसे "ओजोन छिद्र" कहा जाता है।

मानव गतिविधियों से निकलने वाले कुछ रसायन, जैसे CFCs (क्लोरोफ्लोरोकार्बन), ओजोन परत को नुकस

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