गाँव में बड़े भैया की शादी

मेरे बड़े भैया किशन की शादी का जिक्र आज भी घर में कभी-कभी आ जाता है। वो शादी कई साल पहले की बात है, लेकिन उस समय के रीति-रिवाज़ आज भी दिल को छू जाते हैं। गाँव में उस वक्त शादी का माहौल बिलकुल अलग होता था।

शादी से चार-पाँच दिन पहले ही गाँव की औरतें एकत्र होने लगती थीं। वे रात-रातभर गीत गाती थीं, भजन गूँजते थे और घर के आंगन में खुशियों की गूँज सुनाई देती थी। ये गीत सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं होते थे, बल्कि ये परंपरा का हिस्सा थे, जो दूल्हे और दुल्हन के परिवार को एक-दूसरे के करीब लाते थे।

शादी की रात तो खास होती थी। औरतें मंगल गीत गाती थीं और कुछ छोटे-मोटे नाटक भी करती थीं। ये अभिनय मज़ाकिया होता था, लेकिन सबके दिल को छू जाता था। गाँव की हर छोटी-बूढ़ी, बच्ची-जवान सबका इसमें योगदान होता था।

आजकल शहरों में शादियाँ तो बहुत शानदार हो गई हैं, लेकिन उस गाँव की सादगी और रिश्तों की गरिम

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