कुरान को लिपिबद्ध करने का इतिहास

कुरान के लेखन और संकलन को लेकर इस्लामिक इतिहास में कई महत्वपूर्ण नाम आते हैं। पैगंबर मोहम्मद साहब के समय में जैसे-जैसे आयतें (श्लोक) अवतरित होती थीं, उन्हें उनके भरोसेमंद साथियों द्वारा लिखा और याद किया जाता था। परंपरा के अनुसार, हजरत अली बिन अबी तालिब को उन प्रमुख साथियों में माना जाता है जिन्होंने सबसे पहले कुरान की आयतों को लिखना शुरू किया था। उनके अलावा, पैगंबर साहब ने कई अन्य शिक्षित साथियों को भी इस कार्य के लिए नियुक्त किया था।

पैगंबर मोहम्मद के जीवनकाल में कुरान अलग-अलग सामग्रियों जैसे खजूर की पत्तियों, चमड़े, पत्थरों और हड्डियों के टुकड़ों पर लिखा गया था। हालांकि, इसे एक पूरी पुस्तक का रूप बाद में दिया गया। प्रथम खलीफा अबू बक्र के शासनकाल में, ज़ैद बिन साबित को सभी बिखरे हुए अंशों को एकत्र करके कुरान को एक ग्रंथ के रूप में संकलित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद तीसरे खलीफा उस्मान बिन अफ़्फान के समय में इसका एक प्रामाणिक रूप तैयार कर सभी क्षेत्रों में भेजा गया।

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