कृषि जैव प्रौद्योगिकी का विकास और इसकी शुरुआत

कृषि जैव प्रौद्योगिकी (Agricultural Biotechnology) की मुख्य शुरुआत 1990 के दशक में मानी जाती है, जब पहली बार इस तकनीक से तैयार की गई फसलों को व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारा गया था। इससे पहले वैज्ञानिकों ने प्रयोगशालाओं में जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए पौधों में सुधार करने पर वर्षों तक शोध किया, लेकिन 90 का दशक वह समय था जब यह तकनीक सीधे खेतों तक पहुंची।

बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग करके फसलों के डीएनए (DNA) में इस तरह सुधार किया गया कि वे कीटों, बीमारियों और खराब मौसम का सामना बेहतर तरीके से कर सकें। इस बदलाव ने न केवल अमेरिकी किसानों को, बल्कि दुनिया भर के किसानों को अधिक पैदावार देने वाली और मजबूत किस्मों के बीज उपलब्ध कराए।

आज जैव प्रौद्योगिकी केवल एक प्रयोगशाला तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह modern खेती का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। इसकी मदद से सूखा-रोधी और कीट-रोधी फसलें विकसित की जा रही हैं, जो भोजन की बढ़ती मांग को पूरा करने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर रही हैं।

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