भगवान श्रीकृष्ण का रंग नीला क्यों है?

सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण के श्याम रंग और उनके नीले स्वरूप को लेकर कई कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। अमूमन चित्रों और मूर्तियों में कान्हा को नीले रंग में दिखाया जाता है, जिसके पीछे गहरे पौराणिक कारण छिपे हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसके पीछे दो मुख्य घटनाएं बताई जाती हैं। पहली कथा के मुताबिक, जब कंस ने बालकृष्ण को मारने के लिए पूतना नामक राक्षसी को भेजा था, तब पूतना ने उन्हें विषयुक्त स्तनपान कराया था। भगवान ने उसके प्राण तो हर लिए, लेकिन उस भयानक विष के प्रभाव से उनका शरीर नीला पड़ गया। दूसरी प्रचलित मान्यता कालिया नाग से जुड़ी है। यमुना नदी में रहने वाले अत्यंत विषैले कालिया नाग के मर्दन के समय, उसके भीषण जहर के कारण श्रीकृष्ण का रंग पूरी तरह नीला हो गया था।

आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के मानव अवतार थे। विष्णु जी का संबंध अनंत ब्रह्मांड और असीम ऊर्जा से है। जैसे विशाल आकाश और अगाध समुद्र का रंग नीला दिखाई देता है, वैसे ही नीला रंग उनकी अनंतता, दिव्यता और सर्वव्यापकता का प्रतीक है। जो तत्व हमारी सोच और सीमाओं से परे होता है, वह हमें नीला दिखाई देता है। यही कारण है कि लीलाधर के इस अलौकिक रंग को प्रकृति और ईश्वर की अनंत शक्ति के रूप में पूजा जाता है।

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