कृष्ण के अनुसार सत्य क्या है?
जब हम कृष्ण के बारे में सोचते हैं, तो हम सिर्फ एक दैवीय रूप की कल्पना नहीं कर रहे होते, बल्कि हम परम सत्य की ओर देख रहे होते हैं। कृष्ण स्वयं कहते हैं कि वे सभी अस्तित्व का मूल हैं, सभी कारणों का अंतिम कारण। यही वह सत्य है जिसे संस्कृत में सत्यम परम कहा जाता है — सबसे ऊँचा, अटल, अविनाशी सत्य।
इस दुनिया में जो सत्य हम देखते हैं, वह अक्सर बदलता रहता है। एक व्यक्ति के लिए सच दूसरे के लिए नहीं हो सकता। लेकिन कृष्ण के अनुसार, अंतिम सत्य वह है जो कभी नहीं बदलता — वह तो व्यक्ति नहीं, बल्कि व्यक्ति के पार का अनंत आत्मा है, जिसका स्रोत स्वयं कृष्ण हैं।
गीता में कृष्ण स्पष्ट करते हैं कि जो मनुष्य इस परम सत्य को जान लेता है, वह सभी भ्रमों से मुक्त हो जाता है। यह सत्य न तो केवल एक दार्शनिक विचार है, बल्कि एक अनुभव है — जब हृदय में कृष्ण की उपस्थिति का एहसास होता है, तो सब कुछ स्पष्ट हो जाता है।
इसलिए, कृष्ण
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।