क्या अमेरिका पर भारत का भी कर्ज है?

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, अमेरिका पर वैश्विक स्तर पर भारी-भरकम कर्ज का बोझ है। आमतौर पर अमेरिका को अन्य देशों की वित्तीय मदद करने के लिए जाना जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए विदेशी बाजारों और निवेशकों से बड़े पैमाने पर धन जुटाता है।

अगर भारत की बात करें, तो अमेरिका पर भारत का भी लगभग $216 अरब (करीब 216 Billion Dollars) का कर्ज है। यह कर्ज सीधा किसी व्यक्तिगत ऋण की तरह नहीं होता, बल्कि भारत का केंद्रीय बैंक (भारतीय रिजर्व बैंक) अपनी विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज (Treasury Securities) और बॉन्ड्स में निवेश करता है। अमेरिकी सरकार द्वारा जारी ये सरकारी बॉन्ड सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, जिन पर नियमित ब्याज मिलता है।

वर्तमान में अमेरिका की कुल उधारी या देनदारी $29 लाख करोड़ डॉलर से भी अधिक हो चुकी है। चीन और जापान के साथ-साथ भारत भी अमेरिका के सबसे बड़े कर्जदाताओं में शामिल है। इसका मतलब यह है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका केवल कर्ज लेने वाले देश की नहीं, बल्कि एक मजबूत और रणनीतिक निवेशक की भी बन चुकी है। अमेरिका का यह बढ़ता कर्ज वैश्विक वित्तीय प्रणाली में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को दर्शाता है।

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