गंगा के पुत्र देवव्रत

प्राचीन भारतीय कथाओं में गंगा का विशेष स्थान है। वे न केवल एक पवित्र नदी के रूप में पूजी जाती हैं, बल्कि एक देवी के रूप में भी पूरी तरह सम्मानित हैं। कहा जाता है कि गंगा ने कुरुवंश के राजा शांतनु से विवाह किया था। इस संबंध से उनका एक पुत्र हुआ, जिसका नाम था देवव्रत।

देवव्रत जन्म से ही महान थे।

गंगा ने उसे जन्म देने के बाद कुछ वर्षों तक स्वयं पालन-पोषण कियa। वे उसे विभिन्न कलाओं, युद्ध नीतियों और धर्म की गहन शिक्षा देती रहीं। देवव्रत धीरे-धीरे एक अद्भुत योद्धा और नीति के ज्ञाता के रूप में विकसित हुआ।

जब वह परिपक्व हो चुका, तो गंगा उसे शांतनु के पास लौटा आईं। यह एक भावुक क्षण था। शांतनु ने न केवल गंगा का त्याग सहन किया था, बल्कि अपने पुत्र को शिक्षा और तप के लिए वर्षों दूर रखने का साहस भी दिखाया। यह त्याग और दृढ़ता का प्रतीक है।

देवव्रत बाद में भीष्म के नाम से विख्यात हुए। उनकी प्रतिज्ञा और तपस्या आज भी

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