गंगा और शांतनु: एक पौराणिक प्रेम कथा

भारतीय पुराणों में गंगा और शांतनु का वृंदावन एक अनोखी और गहरी भावनाओं से भरी कथा है। जब महाराज प्रतीप के घर पुत्र का जन्म हुआ, तो उन्होंने उसका नाम शांतनु रखा। यही शांतनु आगे चलकर कौरव-पांडवों के पूर्वज बने।

प्राचीन कथाओं के अनुसार, गंगा देवी ने पृथ्वी पर अवतार लिया और शांतनु से विवाह किया। यह विवाह केवल एक संबंध नहीं, बल्कि दिव्य और मानवीय भावनाओं का अद्भुत मिलन था। गंगा ने शांतनु के साथ सात वर्ष बिताए, लेकिन उनके बीच की कहानी बहुत गहरी थी।

शांतनु ने गंगा को देखते ही प्रेम में पड़ गए थे। गंगा ने उनसे वचन लिया कि वे उनके कर्मों में कभी हस्तक्षेप नहीं करेंगे। लेकिन जब गंगा अपने आठ बेटों में से सात को जन्म देकर गंगा जल में प्रवाहित कर देती हैं, तो शांतनु विचलित हो जाते हैं और अंत में उनका वचन टूट जाता है।

इस घटना के बाद गंगा लौट जाती हैं, लेकिन उनका आठवां पुत्र, भीष्म, जो भीष्म प्र

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