क्या राजपूत विदेशी थे? एक ऐतिहासिक झलक

राजपूतों की उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों में काफी बहस रही है। कुछ विद्वानों के अनुसार, राजपूतों का मूल विदेशी है। ईश्वरी प्रसाद और डी. आर. भंडारकर जैसे प्रख्यात इतिहासकारों ने यह माना है कि राजपूत भारत में आए विभिन्न विदेशी समूहों से उत्पन्न हुए। इनमें हूण, स्कंद, शक और यवन जैसे जनजातियों का नाम आता है, जो मध्य एशिया और मध्य पूर्व से आए थे।

भंडारकर और ब्रिटिश खोजकर्ता एलन कनिंघम के अनुसार, ये समूह समय के साथ भारतीय समाज में शामिल हो गए और धीरे-धीरे उच्च क्षत्रिय वर्ग के रूप में स्थापित हुए। उन्होंने राजपूत कहलाना शुरू किया और अपने शासन, वीरता एवं धर्मनिष्ठा के लिए प्रसिद्धि पाई।

हालाँकि, यह बात ध्यान देने योग्य है कि भारत का इतिहास सदियों से विभिन्न लोगों के मिश्रण से बना है। राजपूतों के विदेशी मूल की बात इतनी महत्वपूर्ण है कि इसने उनकी सांस्कृतिक और राजनीतिक पहच

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