गरुड़ का जन्म: एक दिव्य कथा
गरुड़, भगवान विष्णु के वाहन के रूप में प्रसिद्ध, मात्र एक पक्षी नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति और विश्वास के प्रतीक हैं। उनके जन्म की कथा पुराणों में विस्तार से वर्णित है।
प्राचीन कथाओं के अनुसार, ऋषि कश्यप और देवी विनता के तप और यज्ञ के फलस्वरूप दो अंडे का निर्माण हुआ। ये अंडे इतने तेजस्वी थे कि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखना आवश्यक था। विनता ने इन अंडों की सावधानीपूर्वक देखभाल की। समय आने पर, एक अंडे से गरुड़ का जन्म हुआ।
जन्म के समय ही उनका रूप इतना भयंकर और तेजस्वी था कि आकाश में अंधेरा छा गया और देवताओं ने भी उन्हें देखकर आश्चर्य में पड़ गए। बचपन से ही गरुड़ अमृत की खोज में निकल पड़े और अपनी वीरता व शक्ति से देवताओं के बीच महान स्थान प्राप्त किया।
गरुड़ का जन्म केवल एक घटना नहीं, बल्कि धैर्य, तप और दिव्य शक्ति के संगम की कहानी है। आज भी 21 अप्रैल को कई स्थानों पर गरुड़ जयंती के रूप में मनाया
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