गरुड़ पुराण और हिंदू धर्म में मांसाहार का स्थान
गरुड़ पुराण सहित कई पुराणों में मांस भक्षण को पाप माना गया है। यह मान्यता हिंदू धर्म के कई धार्मिक ग्रंथों में मिलती है। वेदों में भी जीव हिंसा को निषेध किया गया है। अहिंसा को धर्म का मूल सिद्धांत माना जाता है, जिसके कारण कई हिंदू भक्त निरामिष आहार को अपनाते हैं।
गरुड़ पुराण में विशेष रूप से कहा गया है कि जो व्यक्ति मांस खाता है, वह अपने कर्मों के कारण नरक की यातनाएं भोगता है। इसमें यह भी बताया गया है कि जीव हत्या करने वाले और उसका मांस खाने वाले दोनों पाप के भागी होते हैं।
हालांकि, कुछ शास्त्रों में यज्ञों में पशुबलि का उल्लेख मिलता है, लेकिन आधुनिक समय में अधिकांश हिंदू इस प्रथा को छोड़कर शाकाहारी जीवनशैली को प्राथमिकता देते हैं। ऋषि-मुनि, संत और साधुओं ने भी मांस त्याग को आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक माना है।
आज भी बहुत से लोग धार्मिक उत्सव, पितृपक्ष या श्राद्ध के समय गरुड़ पुर
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।