गांधीजी को 'महात्मा' और 'राष्ट्रपिता' की उपाधि
गांधीजी को उनके उत्कृष्ट आचरण के कारण पूरे देश ने 'महात्मा' के रूप में स्वीकार किया। वे जीवन भर अपने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए इस उपाधि की पात्रता अर्जित करते रहे।
इसी प्रकार, वर्ष 1944 में सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर रेडियो से एक संदेश प्रसारित करते हुए पहली बार महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया था।
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