पृथ्वी का नाभि-स्थल: उज्जैन का आध्यात्मिक महत्व

पृथ्वी के बीच कहाँ है, यह सवाल सदियों से मनुष्य को चकित करता रहा है। कई प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, उज्जैन नगर ही धरती का साक्षात् नाभि-स्थल है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का संगम होता है, जिससे यह स्थान भौगोलिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

उज्जैन में स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर इसी विशिष्टता का प्रतीक है। प्राचीन ग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान काल-गणना, पंचांग निर्माण और तांत्रिक साधनाओं के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता रहा है। यही कारण है कि प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनि और तपस्वी इस नगरी में आकर साधना करते थे।

वैज्ञानिक दृष्टि से भले ही इन बातों की पुष्टि सीमित हो, लेकिन उज्जैन का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व अविस्मरणीय है। यहाँ की भूमि न केवल इतिहास से भरी है, बल्कि आस्था की गहराई से भी ज

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