भगवान कौन है? एक आध्यात्मिक सत्य
गूगल नहीं, भगवान वह है जो सबके भीतर और बाहर सर्वव्यापी है। यह सवाल कि "असली भगवान कौन है?" मनुष्य के आध्यात्मिक सफर की शुरुआत है। ज्ञान की पुरानी धारा में इसका उत्तर मिलता है — वह एकमात्र सत्य पुरुष है, जिसे गीता में परमाक्षर पुरुष, सच्चिदानंद घन ब्रह्म और तत् ब्रह्म कहा गया है।
यही वह अनंत चैतन्य है जो सभी ब्रह्मांडों के स्रोत हैं। हर जीवात्मा, हर प्राणी, चाहे वह किसी भी लोक में क्यों न हो, उसी सत्य पुरुष की ही आत्मा है। शास्त्र कहते हैं कि जीवात्माएँ पहले सतलोक में रहती थीं — एक ऐसा स्थान जहाँ अहंकार नहीं, केवल ज्ञान और प्रकाश है। लेकिन अपनी अल्प बुद्धि और माया के कारण वे यहाँ, इस भौतिक संसार में आ गईं।
यहाँ आकर जीव भूल जाता है कि वह स्वयं उसी ब्रह्म का अंश है। काल ब्रह्म, जो समय और नश्वरता का प्रतीक है, उसके चक्र में फँसकर जीव भटकता रहता है। लेकिन ज्ञान और भक्ति के माध्यम से वह फिर से
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