चीन की आजादी और संघर्ष का इतिहास
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि चीन कब आजाद हुआ? भारत की तरह चीन पर कभी किसी एक विदेशी ताकत का सीधा और पूरी तरह से राज नहीं रहा, लेकिन 19वीं और 20वीं सदी में इस पर पश्चिमी शक्तियों और जापान का गहरा प्रभाव और कब्जा रहा।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने चीन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर रखा था। 1945 में जापान के सरेंडर के बाद चीन को आधिकारिक तौर पर एक पूरी तरह से आजाद देश का दर्जा मिला। इस तरह साम्राज्यवादी शक्तियों का नियंत्रण समाप्त हुआ और चीन ने अपनी संप्रभुता वापस पाई।
हालांकि, बाहरी ताकतों से आजादी मिलते ही देश के भीतर नया संकट खड़ा हो गया। 1945 में आजादी के बाद माओ त्से तुंग की अगुवाई वाली कम्युनिस्ट पार्टी और चांग काई-शेक की नेशनलिस्ट (कुओमिंतांग) पार्टी के बीच सत्ता को लेकर भीषण जंग छिड़ गई। इसके बाद अगले 4 साल तक देश में गृहयुद्ध (Civil War) का माहौल बना रहा।
आखिरकार, 1949 में कम्युनिस्टों की जीत हुई और माओ त्से तुंग ने 1 अक्टूबर 1949 को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की स्थापना की घोषणा की। यही वजह है कि चीन में हर साल 1 अक्टूबर को ही उनका मुख्य राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है।
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