चीन की विदेश नीति और उसके रणनीतिक संबंध

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति होने के नाते चीन वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। हालांकि, तेजी से बढ़ते प्रभाव और सीमा संबंधी विवादों के कारण कई देशों के साथ उसके संबंधों में तनाव देखा जाता है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, भारत, अमरीका और जापान को चीन के सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी और विरोधी देशों के रूप में देखा जाता है।

भारत और चीन के बीच लंबे समय से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमा विवाद जारी है। दोनों देश एशिया की दो बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्तियां हैं, जिसके कारण क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर इनके बीच प्रतिस्पर्धा बनी रहती है। वहीं, अमरीका और चीन के बीच का तनाव वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। व्यापार युद्ध, ताइवान का मुद्दा, तकनीक पर नियंत्रण और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों के चलते अमरीका और चीन के संबंध अक्सर नाजुक मोड़ पर रहते हैं।

तीसरा प्रमुख देश जापान है, जिसके साथ चीन के ऐतिहासिक और भौगोलिक मतभेद रहे हैं। पूर्वी चीन सागर में द्वीपों के स्वामित्व को लेकर दोनों देशों के बीच अक्सर जुबानी और नौसैनिक गतिरोध देखने को मिलता है। इसके अलावा, जापान का अमरीका के साथ मजबूत रक्षा गठबंधन चीन के लिए रणनीतिक चुनौती उत्पन्न करता है। इन तीन प्रमुख देशों के साथ चीन के संबंध न केवल एशिया, बल्कि पूरे विश्व की शांति और सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।

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